हिन्दी कौस्तुभ – नव-कोपल विशेषांक, जनवरी 2022

सुबह – शाम का कोहरा, अंगीठी पर सेकते हाथ, मूंगफली – गजक के ठेले और रज़ाई में दुबक के चाय की चुस्की का आनन्द, यही तो लेकर आता है सर्दी का मौसम। दिवाली से लेकर नया वर्ष और लोहड़ी से ले कर संक्रान्ति तक,  इस मौसम में आनन्द ही आनन्द है। इस आनन्द को और बढ़ाने के लिए और नए साल के उपहार के रूप में विश्व हिन्दी ज्योति ने अपनी त्रैमासिक पत्रिका हिन्दी कौस्तुभ का चतुर्थ अंक प्रकाशित किया है। इस पत्रिका का उद्देश्य हिन्दी को बढ़ावा देना है। हमारी मातृभाषा हमें हमसे व हमारी माटी से जोड़े रखती है। विश्व हिन्दी ज्योति के सभी सदस्यों ने इस प्रयास में अपना भरपूर योगदान दिया है। कृपया इस पत्रिका को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाएँ और अपने प्रतिपुष्टि अवश्य प्रदान करें। आगामी अंकों के लिए आप अपनी रचनायें भी vihijpatrika@gmail.com पर भेज सकते हैं।

– मानसी मैहर

2 thoughts on “हिन्दी कौस्तुभ – नव-कोपल विशेषांक, जनवरी 2022

  1. दो कुण्डलिया

    १.हवा जरा सा गरम हुई,समझो फागुन आए
    आमों में मंजर पड़े,कोकिल बैठी गाए
    कोकिल बैठी गाए,हरित पल्लव की छाया
    मासों में मधुमास,सभी के मन को भाया
    कहे कश्मीरा आज,शिशिर की है यही दवा
    खिल गए सारे फूल,ज्युँ फागुन की बही हवा।।

    २.गंध भरेगी धूप से, हवा भरेगी रंग
    फूलों का मौसम हुआ,बदले तितली ढंग
    बदले तितली ढंग,बहे शीतल पुरवायी
    कलियों की मुसकान, सभी के मन को भायी
    भौरों की गुंजार, फिर हुई कोश में बंद
    हँस दिए सारे फूल, हवा में भर गई गंध ।

    कश्मीरा सिंह ।

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